Thursday, 17 March 2016

मेरा कारोबार

खुदा का हम तो
ऐसे एहतराम करते हैं,
तुझे ही चाहते हैं
तुझे सलाम करते हैं /
मेरी ये शोहरत तनहा
भला कहाँ मेरी,
हमें अपनी तो खबर नहीं
पर तेरा नाम करते हैं

Tuesday, 28 October 2014

दिल बेचारा

दिल बेचारा

दे ही दूँ किसी को तो ये तो शायद कुछ संभल जाये
दिल अपना अपने ही पास कँहा महफूज़ होता है  /
एक और मर्तबा मोहब्बत कर ही ली जाये तनहा
दर्द कुछ ज़िन्दगी से कम हुआ महसूस होता है   

Friday, 24 October 2014

careless whispers

मुंह चिढाकर मुझको ,
वो भागे झट से मेरे कमरे से /
फिर झट से आकर अन्दर बोले
" इसे प्यार न समझ लेना "/
जब बाहर जाकर देखा तो...
पाया उनको अपने ही आँगन में /
वो निगाहें नीची करके बोले
"इसे इज़हार न समझ लेना "

मेरा तो यही हाल है ..

मेरा तो यही हाल है। 


न जाने किस ओर निग़ाहें किये बैठा रहा ये ज़माना
मेरी  तो महज़ कुदरत के नज़ारों में ज़िन्दगी रही /
होती होंगी औरों की इबादत दैरो -हरम में तनहा
मेरी तो फ़क़त आशिकी ही ताउम्र मेरी बंदगी रही  

Thursday, 28 August 2014

सवाल पर सवाल

सवाल पर सवाल

 दर्जनों रस्तें हैं मेरे घर को आते
सोचते क्या हो के "कहाँ से आऊँ ?''
ख़त में क्या पूछते हो  "कैसे हो?"
इतना बड़ा काग़ज़ मैं कहाँ से लाऊँ ?
 

Sunday, 24 August 2014

जीना दुश्वार नहीं नहीं

जीना दुश्वार नहीं नहीं 

बन जा मस्त फ़क़ीर

ये कोई जादू नहीं जो इस तरह तबस्सुम लिए फिरुँ हूँ मैं 
अश्क़ लिए ग़मों के पहाड़ के ऊपर बैठके रोया नहीं कभी 
दुनिया की कामयाबी से न जला न रखा ताल्लुक़ कोई 
सुकूँ की चादर ओढ़े सोया चैन अपना खोया नहीं  कभी 
नफरत को न दी तरजीह मैंने उल्फ़त से हर काम किया 
जिसपे बने अदावत का शजर बीज ऐसा बोया नहीं कभी  

इबादत

इबादत 

बड़े इलाज लेके घूमा किया मैं देस परदेस  
 तेरे ही शहर में लिखा था बीमार होना  मेरा 
न ख़ौफ़ खा तू देखके मुझको यूँ तड़पता हुआ 
 मैं रक़्स करने लगूँगा होते ही दीदार तेरा /

 और तू कह भी  दे अगर कि तू ना आएगा 
मैंने तो अब यहीं पर है डाला डेरा अपना 
तेरे ही दर पे निग़ाहें किये बैठा रहूँगा 
देखता रहे सारा तमाशा चाहे ये बाज़ार तेरा