Thursday, 5 July 2012

dayare se baahar

Unshackle yourself.
अपनी ज़ात से
बाहर निकल
तुम देखते कुछ
मंज़र और भी /
बिन धूप औ' पानी
... चमन में फूल
खिलते
तो खिलते कैसे भला /
लिए बर्फीले हाथ
और
ठंडा जिस्म
और ठंडी जाँ /
तुम
गर्मजोशी से
मिलते
तो मिलते कैसे भला ..

1 comment:

  1. शनिवार 07/07/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. आपके सुझावों का स्वागत है . धन्यवाद!

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